घोसी। इन दिनों द्विअर्थी व फूहड़ भोजपुरी गीतों का चलन बढ़ गया है। वक्त चाहे पूजा का हो या वैवाहिक आयोजन हर जगह इन्हीं द्विअर्थी व फूहड़ गीतों की धूम है। सबसे हास्यास्पद तो यह है कि इन गीतों में इस कदर से अश्लीलता परोसी जा रही है कि कोई भी सार्वजनिक तौर पर सुनकर शर्म खा जाए। इन गीतों के चलन से समाज पर खासकर नई पीढ़ी पर गलत असर पड़ रहा है।
इस सम्बंध में शनिवार की देर शाम घोसी नगर में भोजपुरी फ़िल्म अभिनेता जे. के. चौहान के आवास पर एक व्यक्तिगत कार्यक्रम में आये लगभग चार दशक से भोजपुरी गीत लिखने वाले वरिष्ठ गीतकार दीप मुहम्मदबादी ने पत्रकारों से एक बातचीत में कहा कि सबसे अधिक पीड़ा इस बात की होती है कि गीत व संगीत जिसके माध्यम से न केवल समाज में परिवर्तन दिखता था बल्कि व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बदल जाता था। उसी गीत व संगीत को आज किस कदर प्रस्तुत किया जा रहा है। इस तरह के अश्लील व द्विअर्थी गीतों को रचनाकार कैसे रचते हैं और जिस बात को सार्वजनिक तौर पर कह नहीं सकते उसे किस कदर गायक गाते हैं। यह सब देखकर दुख होता है।
बातचीत के बढ़ते क्रम में दीप मुहम्मदबादी ने कहा कि ये चीजें इसलिए बढ़ती जा रही है क्योंकि श्रोता भी इस तरह के गानों को पसंद कर रहे हैं और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने इसका प्रतिकार करना छोड़ दिया है। अश्लील गीत लिखने वालों तथा गाने वालों का बायकाट होना चाहिए। इसलिए प्रबुद्ध लोगों को ध्यान देना होगा कि नई पीढ़ी को समझा कर किसी भी महत्वपूर्ण अवसर पर अश्लील भोजपुरी गीतों को बजने से रोका जाए।
इस अवसर पर ग़ज़ल गायक बलवंत सिंह, संगीत महाविद्यालय प्रबंधक राजीव चौबे, जे के आर्ट, रूपेश सिंह आदि गीत संगीत प्रेमी मौजूद रहे।
किसी भी कीमत पर नही लिख सकता अश्लील गीत: दीप मोहम्मदाबादी
Sourceयशोवर्धन दुबे





