वाइल्ड लाॅः आम आदमी को इलाज मिलना बंद, ’मौजूद सुविधाएं खास के लिए लाॅक’

-न बैड, न वैंटीलेटर, न दवाएं, हर ओर मची अफरातफरी
-चुनावों में लगे अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नेताओं की सेहत को लेकर बढी चिंता
-अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नेताओं की इतनी बडी लाॅबी है कि सांसाधन इनके लिए भी नाकाफी साबित होंगे

मथुरा/ मदन सारस्वत। आम आदमी को इलाज मिलना बंद हो गया है। जनपद में जो भी चिकित्सकीय संसाधन मौजूद हैं उन्हें खास लोगों की जिंदगी बचाने के लिए लाॅक कर दिया गया है। निजी और सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद हैं। कोविड सेंटरांे में वैंटीलेटर और बैड की उपलब्धता को लेकर कोई मुहं खोलने को तैयार नहीं है। कहीं कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। लोग अपने मरीजों को लेकर सडक पर इधर से उधर भाग रहे हैं। किसी को भी फोन लगाओ कोई फोन उठाने को तैयार नहीं है। मथुरा में जो चिकित्सकीय संसाधन मौजूद हैं उनपर जनपद के खास लोगों के अलावा पडोसी जनपदों के खासमखास का अतिरिक्त बोझ भी पड रहा है। कोरोना को लेकर स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। ऐसे में सभी को अपने और अपनों की चिंता ने घेर लिया है। खुद बचो और अपनों को बचाओं का वाइल्ड लाॅ लागू हो गया है। नेता, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, अधिकारी इनकी और इनके अपनों की इतनी बडी लाॅबी है कि मौजूदा चिकित्सकीय संसाधन इनके लिए भी नाकाफी साबित हो सकते हैं। अधिकारी, नेता और जनप्रतिनिधि लगातार त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों मंे व्यस्त हैं। नेता और जनप्रतिनिधि को हर हाल में वोट चाहिए, ये लोग दो गज की दूरी और मास्क के चक्कर में नहीं पडना चाहते हैं। वह लोगों को गले भी लगा रहे हैं और पैर भी छू रहे हैं। अधिकारी भी यहां वहां भीड से घिर जाते हैं। 29 अप्रैल को मतदान होना है ऐसे में कोई कोरकसर छोडने को तैयार नहीं। इन हालातों में कोई भी खास या उनका खासमखास कोरोना की गंभीर स्टेज पर पहुंच सकता है। ऐसे में उनकी जान बचाना पूरे सिस्टम का नैतिक धर्म बन गया है। इस स्थिति से निपटने को अघोषितरूप से आम आदमी को इलाज देना लगभग बंद कर दिया गया है। अगर कोई सामान्य व्यक्ति कोरोना की बजाय किसी दूसरी बीमारी से ग्रसित हो जाये तो भी उसे इलाज मिलना संभव नहीं है। अस्पतालों में ओपीडी बंद हैं। चिकित्सक देखने को तैयार नहीं, सिस्टम का पूरा ध्यान कोविड सेंटरों पर है और आम आदमी की पहंुच इन तक नहीं है। नियम कायदे कानून का अता पता नहीं है। जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर पूरा सिस्टम चल रहा है। जिस समय एक आम आदमी से यह कहा जाता है कि जिले में कोई वैंटलेटर खाली नहीं है, ऐसे में अगर विधायक, सांसद, मेयर या कोई बडा नेता अथवा अधिकारी बीमार हो जाये तो इलाज नहीं मिलेगा। आपके अंदर सुविधाओं को छीनने का माद्दा है या खरीदने की औकता है तो आपको इलाज मिलेगा नहीं तो मौत सिस्टम ने आपके भाग्य में लिख दी है।

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