मथुरा : जब स्वास्थ्य केंद्र ही बीमार, तो कैसे मिले ग्रामीणों को उपचार

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल हैं सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं
  • ग्रामीणों को नहीं मिल रहा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

    मथुरा/ मदन सारस्वत। ग्रामीण क्षेत्रों में फैली बीमारी की सूचना पर आगरा से लेकर लखउन तक की टीमों ने गांवों की ओर दौड लगा दी है। फरह ब्लॉक के गांव कोह में बुखर से सात बच्चों की मौत और जचौंदा भी मौत का मामला सामने आने के बाद  जिला प्रशासन भी हरकत में है। जिलाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के आलाधिकारी गांवों की ओर दौड पडे हैं। आननफानन में प्रभावित गांवों में फागिंग कराई जा रही है। सफाईकर्मियों को भी लगा दिया गया है। ऐसा दिखाया जा रहा है कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य के प्रति अधिकारी बेहद चिंतित और सतर्क हैं। हकीकत इसके ठीक विपरीत हैं। हो सकता है कई मौतों के बाद इन गांवों में फौरी तौर पर कुछ काम हो जाएं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कुछ सुधार होगा इस बात की उम्मीद बेहद कम हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रो में बने स्वास्थ्य केन्द्रों में वर्षों से कोई चिकित्सक ही नहीं पहुंचा है। कहीं उपले भरे हैं तो कही पशु बंधे हैं। कहीं बिल्डिंग ही जर्जर होकर गिर रही है तो कहीं ग्रामीणों ने कोई उपयोग होता नहीं देख अपने काम में लेना शुरू कर दिया है। उदाहरण के तौर पर मथुरा के राया ब्लॉक के गांव खिरारी में वर्ष 2005 में बना प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टर और दवाओं की बाट जोह रहा है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में बंद पड़े इस उपस्वास्थ्य केंद्र में जहां कुछ लोगों ने अपने पशुओं का चारा भर रखा है, तो किसी ने जलावन के उपले यहां रख दिए गए। कोरोना के तांडव के दौरान भी जहां लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे थे। अब हालात थोड़े काबू में आए हैं, तो इस गांव के ग्रामीणों ने भी उच्च अधिकारियों से गांव के इस उपस्वास्थ्य केंद्र को दोबारा से ग्रामीणों की सेवा के लिए चालू किए जाने की मांग की है। इसी  क्षेत्र के गांव नगोड़ा में भी एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग है जिसकी हालत दयनीय है। गांव नगौड़ा में लाखों रुपये की लागत से बना अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य ग्रामीणों को मुंह चिढा रहा है।  ग्रामीणों का कहना है कि जब से यह स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है उस समय से आज तक कोई भी चिकित्सक या कोई  स्टाफ नर्स स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं बैठा है। करीब 10 वर्ष पूरे हो चुकी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बने स्वास्थ्य केन्द्रों की यही स्थिति है। जिसकी टोह लेने वाला कोई नहीं है।

    यहां अस्पताल तोड कर बना दिया पंचायत घर
    महावन तहसील की ग्राम पंचायत कारब में पंचायत घर नहीं था। सरकार की ओर से फरमान आने के बाद पंचायत घर के लिए जमीन की तलाश शुरू हुई। जमीन की तलाश उस बिल्डिंग पर जाकर पूरी हुई जिसमें पिछले करीब 40 साल से स्वास्थ्य केन्द्र चल रहा था। बिल्डिंग को खाली करा लिया गया। यहां बिल्डिंग को तोड कर पंचायत भवन का काम चल रहा है। इसके बाद स्वास्थ्य केन्द्र के लिए न कोई जगह तलाशी गई और नहीं बिल्डिंग। ग्रामीणों को नहीं पता स्वास्थ्य केन्द्र कहां है।

    आदेश आएगा तो पंचायत घर तोड कर अस्पताल बना देंगे
    ग्रामीणों ने जब अस्पताल की जगह पंचातय घर बनाने का विरोध किया और इसकी शिकायत अधिकारियों से की तो ग्रामीणों को बेहद हास्यादपद जबाव मिला। ग्रामीणों को कह दिया गया कि अभी पंचायत भवन बनाने के आदेश हैं। शिकायत करते रहो जब आदेश आएगा पंचायत भवन को तोड कर अस्पताल बना देंगे।

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