जंतर-मंतर में धरना-शक्ति प्रदर्शन में झारखंड समेत कई प्रदेश के आदिवासी प्रतिनिधि हुए शामिल

  • राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग, महा रजिस्ट्रार जनगणना आयोग को ज्ञापन

दिल्ली। देश में होने वाले अगले जनगणना फार्म में आदिवासी/ट्राइबल धर्म कोड लागू कराने की मांग को लेकर दिल्ली में दस्तक दी गयी. दिल्ली के जंतर-मंतर में राष्ट्रीय आदिवासी इंडिजिनियस धर्म समन्यव समिति के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया. इस कार्यक्रम में झारखंड से समिति मुख्य संयोजक अरविंद उरांव, निरंजना हेरेंज, धीरज भगत, तेज कुमार टोप्पो, भीम आर्मी के संदीप कुमार, टेक्निकल सेल के बिगु उरांव, विकास मिंज, अनिल उरांव आदि शामिल हुए. इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, असम, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित झारखंड के आदिवासी अगुवा शामिल हुए. सभी  ने धर्म कोड की मांग को लेकर अपना शक्ति प्रदर्शन भी किया.कार्यक्रम में भारत के 21 राज्य से आदिवासी साहित्यकार, इतिहासकार, समाज चिंतक, समाज सेवक, बुद्धिजीवी, लेखक भी शामिल होकर आदिवासी धर्म कोड की मांग को मजबूती प्रदान की.

आदिवासी हिंदू नहीं, साजिश के तहत आजादी के बाद कोड हटाया गया

मुख्य संयोजक अरविंद उरांव ने कहा कि आदिवासी किसी भी परिस्थिति में हिंदू नहीं है. आदिवासी जनजातियों का रिती-रिवाज, पूजा-पद्धति, जन्म-शादी मरण संस्कार हिंदुओं से भिन्न है. इसलिए इसकी अस्मिता पहचान की रक्षा के लिए होने वाले जनगणना के फॉर्म में आदिवासियों के लिए अलग कोड होना नितांत आवश्यक है. ब्रिटिश शासन काल 1871-1941 तक की हुई जनगणना प्रपत्र में देश के आदिवासियों के लिए अलग 7वां कॉलम अंकित किया गया था, जहां देश के आदिवासी, धर्म के स्थान पर खुद को अन्य धर्म जैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन से अलग मानकर 7वें में कॉलम पर अपना धर्म लिखते थे. परंतु देश की आजादी के बाद एक बड़ी और सोची समझी साजिश के तहत देश की आजादी के बाद सुनियोजित तरीके से कॉलम को हटा दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम सेक्शन-2 में स्पष्ट अंकित है की यह अधिनियम शेड्यूल्ड ट्राइब्स पर लागू नहीं होता है, क्योंकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स का पूजा व शादी विधान, हिंदू शादी विधान से अलग है. कहा कि देश के आदिवासी ना ही आस्तिक हैं, ना ही नास्तिक है वे सभी वास्तविक हैं.

प्रकृति की रक्षा और प्रकृति के साथ चलने वाले आदिवासी ही भारत के मूल निवासी हैं और इनका अस्तित्व और पहचान के लिए जनगणना प्रपत्र में कॉलम होना चाहिए.  विभिन्न राज्य से पहुंचे अगुवाओ ने आह्वान करते हुए कहा कि जब तक धर्म कोड का मांग पूरा नहीं होता है, तब तक उलगुलान जारी रहेगा. धरना प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग, महा रजिस्ट्रार जनगणना आयोग को ज्ञापन सौंपा गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय आदिवासी इंडीजीनस धर्म समन्वय समिति भारत के राष्ट्रीय सह संयोजक राजकुमार कुंजाम, राष्ट्रीय आदिवासी इंडीजीनस धर्म समन्वय समिति भारत के सदस्य सह पूर्व प्रोफेसर एवं आदिवासी साहित्यकार मार्गदर्शक डॉ हीरा मीणा, निरंजना हेरेंज, धीरज भगत, तेज कुमार टोप्पो, प्रहलाद सिडाम, नारायण मरकाम, एनआर हुआर्या, गेंदशाह उयके, अरविंद शाह मंडावी, राजकुमार अरमो, सुखु सिंह मरावी, दर्शन गंझू, भरत लाल कोराम, भीम आर्मी के संदीप कुमार, टेक्निकल सेल के बिगु उरांव, विकास मिंज, अनिल उरांव, संदीप उरांव, सुका उरांव, संचरिया उरांव, ममता कुमारी, प्रेम प्रकाश भगत, इंदरजीत उरांव सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रबुद्धजन शामिल हुए.

 

 

 

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