मनुष्य का मूल स्वभाव आनन्द ही है और कथा की फलश्रुति भी यही है – श्रीपुण्डरीक गोस्वामी

हरिद्वार। महाकुम्भ 2021 के अंतर्गत श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार के सारस्वत परिसर स्थित “मृत्युंजयमंडपम्” में पूज्य “आचार्यश्री” जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्रीमद् माध्वगौडेश्वर जगद्गुरु श्रीपुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज के श्रीमुख से ‘श्रीवाल्मीकि रामायण कथा’ का चतुर्थ दिवस संपन्न हुआ ।

आज कथा के चतुर्थ दिवस के आरम्भ में पूज्य श्रीपुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि उपदेश व्यवहार में तभी उतरता है, जब हमारी अन्तर्चेतना उसे स्वीकार करे। श्रवण ऐसी वस्तु है, जो जीव को दिव्यता का संचार करती है। मनुष्य का मूल स्वभाव आनन्द ही है और कथा की फलश्रुति भी यही है।

कथा प्रसंग में आज परात्पर ब्रह्म भगवान श्रीराम का प्राकट्य हुआ। भगवान श्रीराम के साथ ही भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म की सुंदर कथा और उनके जन्म के गूढ़ रहस्य को उद्घाटित किया।

आज के कथा श्रवण हेतु पूजनीया महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी महाराज, आदरणीय श्री विवेक जी ठाकुर, संस्था के न्यासीगण सहित बड़ी संख्या में सन्त-साधक एवं श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।

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