जीवन जीने की कला है श्रीरामचरितमानस: किशोरी साक्षी जी

सोनभद्र। जनपद के घोरावल परिक्षेत्र स्थित शिवद्वार में वृन्दावन से आईं किशोरी साक्षी जी ने ईश्वर के मूलरूप, उसके अधिपत्य और मर्म का गहन विश्लेषण करने के साथ ही जीवन के महत्वपूर्ण संदेश स्वीकार्य शिरोधार्य करने का प्रबलता व प्रखरता से आत्मसात करने की बात कही। रामचरित मानस को जीवन जीने की कला बताया। सोन विंध्य गंगा सेवा संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित दस वर्ष के यज्ञ व कथा का सारगर्भित निहितार्थ व भावार्थ व्याख्यायित करते हुए शबरी प्रसंग को उद्घाटित किया।कथा के अंतिम दिवस विश्राम के साथ सोन विंध्य गंगा सेवा संस्कृति संस्थान सोनभद्र के संरक्षक पंडित रामनिवास शुक्ल ने संस्थान के तत्वावधान में द्वितीय वर्ष के इस महायज्ञ की सफल जीवन्त प्रस्तुति और विश्व कल्याण की कामना को साकार सार्थक स्वरूप प्रदान करने की परिणति बताया और समस्त समुदाय को साधुवाद कहा तो संस्थान के संस्थापक व संचालक डॉ.परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव”पुष्कर” ने शिवद्वार के ऊर्जस्वित धराधाम में पुण्य प्रदाई कार्य के लिए सबका आभार ज्ञापित किया। उपस्थित भक्तप्रण समुदाय रविवार तक कथा श्रवण किया जिसमें पंडित रामनिवास शुक्ल, विजयानन्द मिश्र, डॉ.परमेश्वर दयाल पुष्कर, उदितलाल अग्रहरि, अशोक कुमार उमर, कैलाश प्रसाद गुप्त, सालिकराम गुप्त, रामनयन मिश्र, अनुष्का पाठक, क्षमा द्विवेदी, दीपिका पाठक,सुरेश गिरि, अजय गिरी समेत शताधिक श्रद्धालुओं का जमावड़ा मुख्य रहा। यज्ञाचार्य पंडित प्रशान्त त्रिपाठी ने श्रीरामकथा में सम्मिलित लोगों का आभार ज्ञापित करते हुए सोमवार को यज्ञ पूर्णाहुति व भंडारा समष्टिभोज तथा यज्ञशाला परिक्रमा करने का आह्वान भी किया।

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