धनुष भंग कर श्रीराम ने किया अहंकार का नाश: रामचंद्र व्यास

जमालपुर। क्षेत्र के हसौली गांव में चल रहे श्रीराम कथा के चौथे दिन मंगलवार को कथा वाचक पं रामचंद्र व्यास सीता स्वयंवर की कथा सुनाई।

उन्होंने कहाकि धनुष भंग कर श्रीराम ने अहंकार का नाश किया एवं लक्ष्मी स्वरूपा सीता का वरण कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि अहंकार के आवरण से आच्छादित राजागण शिव धनुष को हिला तक नहीं पाएं लेकिन श्रीराम ने एक बार में ही धनुष को भंग कर दिया।इसका मूल कारण यह था कि गुरु की उपस्थिति में शिष्य बड़ा से बड़ा काम कर सकता है।उस सभा में श्रीराम के अलावा अन्य कोई राजा अपने गुरु के साथ नहीं आया था। उन्होंने गुरु की महिमा का प्रतिपादन किया एवं कहाकि गुरु की कृपा से बहुत बड़ा काम भी लघु बन जाता है। सीता स्वयंवर से ही श्रीराम के लोक कल्याणकारी व्यक्तित्व का निदर्शन हुआ। परशुराम जी की परीक्षा में भी श्रीराम ने उत्तीर्ण होकर अपने विशाल व्यक्तित्व से लोगों को परिचित कराया।इस दौरान श्रोता जय श्री राम का बार बार उद्घोष कर रहे थे।
इस दौरान प्रमुख रूप से नरेंद्र नाथ द्विवेदी, जय प्रकाश, ओमप्रकाश दूबे, श्यामसुंदर, रविन्द्र दूबे, भगवान दास पांडेय, नीतेश कुमार सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

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