वाराणसी। हमें यह जानना चाहिए कि कौन सी दशा अंतर्दशा में अनिष्ट कारक योग होने पर भगवान शंकर की उपासना करनी चाहिए । 1. सूर्य की महादशा में सूर्य की अनिष्ट कारक अंतर्दशा हो तो उस दोष की निवृत्ति के लिए मृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए ।इसी प्रकार सूर्य की महादशा में शनि एवं केतु की अंतर्दशा होने पर मृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करने से अप मृत्यु का निवारण हो जाता है। 2. चंद्रमा की महादशा में गुरु की अंतर्दशा होने पर यदि अनिष्ट कारक योग हो तो अपमृत्यु होती है इसीलिए इस दोस्त की निवृत्ति के लिए शिव सहस्त्रनाम का जप करना चाहिए । चंद्रमा में शनि की अंतर्दशा होने पर शरीर में कष्ट होता है अतः मृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। साथ ही केतु की अंतर्दशा में भी भय होता है और रोग उत्पन्न होता है इसीलिए यहां भी मृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए।3. मंगल की महादशा में मंगल की अंतर्दशा हो तो भगवान शिव के नाम का जप एवं वृषभ दान करना चाहिए ।मंगल की महादशा में राहु की अंतर्दशा होने पर नाग का दान करना चाहिए एवं ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। 4. राहु की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा दोषकारक होने पर अपमृत्यु की संभावना रहती है इसलिए सोने की प्रतिमा का दान एवं शिव पूजन करना चाहिए।5. बृहस्पति की महादशा में अनिष्ट कारक बृहस्पति के योग होने पर शिव सहस्त्रनाम का जप एवं गोदान करना चाहिए। 6. शनि की महादशा में शनि की अंतर्दशा एवं राहु की अंतर्दशा में मृत्युंजय मंत्र का जप कराना चाहिए। 7. बुध की महादशा में मंगल की अंतर्दशा, बृहस्पति की अंतर्दशा एवं शनि की अंतर्दशा ठीक न रहे तो मृत्युंजय मंत्र तथा शिव सहस्त्रनाम के जप करने से अपमृत्यु का निवारण होता है। 8. केतु की महादशा 7 वर्ष की रहती है। इस 7 वर्ष में केतु में केतु तथा बृहस्पति ग्रह की दोषकर अंतर्दशा होने पर स्वास्थ्य की हानि एवं अपने भाई बंधुओं से बिछड़ाव होता है । ऐसी स्थिति में भी महामृत्युंजय जप कारगर है । 9.शुक्र ग्रह की महादशा में राहु बृहस्पति एवं केतु की अंतर्दशा हो तो भी अपमृत्युप्राप्त हो सकती है। भगवान शंकर के पार्थिव पूजन, महामृत्युंजय मंत्र के जप, रुद्राष्टाध्यायी का पाठ आदि विशेष लाभकर है। इस प्रकार ज्योतिष शास्त्र से काल का सम्यक ज्ञान कर भगवान शिव के शरण में जाकर उनका पूजन और उपासना करने से सारे ग्रह दोष दूर हो जाते हैं।
आचार्य पं0 धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय, ज्योतिर्विद व प्राध्यापक- हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, वाराणसी।
निदेशक- काशिका ज्योतिष अनुसंधान केंद्र।
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