स्कूल ने परीक्षा से रोके छात्र, धरने पर बैठे अभिभावक

  • अभिभावक दे रहे नियमों का हवाला, मैनेजमेंट हालातों का
  • अभिभावक बोले हम छह माह की फीस देने को हैं तैयार

मथुरा/ मदन सारस्वत। कोरोना के चलते पिछले एक साल मंे अधिकांश समय स्कूल कालेज बंद रहे हैं। लोगों की आमदनी भी ठप रही है। बच्चे पढने नहीं गये और माता पिता कमाने नहीं जा पाये। एक बार फिर कोरोना को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, कोई नहीं कह सकता है कि आगामी दिनों में क्या होने जा रहा है। ऐसे में सभी चिंतित हैं। अपने पाल्यों को लेकर भी और अपने रोजगार को लेकर भी। मंगलवार को हालातों की ज्वलंतता ग्रेस काॅन्वेंट सीनियर सैकिण्ड्री स्कूल कृष्णा नगर में देखने को मि ली। मंगलवार को बच्चे स्कूल में परीक्षा देने पहुंचे स्कूल प्रबंधन की ओर से उन बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया जिनके अभिभावकों ने पूरी फीस जमा नहीं की है। जब इसकी सूचना अभिभावकों को मिली तो वह स्कूल पहुंच गये। प्रबंधन के साथ बात हुई लेकिन बात नहीं बनी। यहां तक कि अभिभावक इस बात पर राजी हो गये कि वह छह महीने की फीस जमा कर देंगे, बच्चों को परीक्षा में बैठने दिया जाये। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि पूरे एक साल की फीस जाम करनी होगी। स्कूल प्रबंधन नियमों और अभिभावक हालातों का हवाला देते रहे। जब बात नहीं बनी तो खीजे हुए अभिभावक स्कूल परिसर में ही धरने पर बैठ गये। उन्होंने डर की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया और मास्क भी लगाये कि कहीं बात उल्टी ही न पड जाये।

अभिभावको का कहना था कि जब बच्चे पढे ही नहीं तो हम पूरी फीस कैसे और कहां से दें। जबकि 2020 से हम सभी की आमदनी खत्म हो गयी है। उसके बाबजूद कोरोना फिर से भयंकर तरीके से फैल रहा है। अभिभावक चाहते हैं कि हम छह माह की फीस जमा करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि जब विद्यालय पूरी साल बंद रहा। बिजली इस्तेमाल नही हुई, टीचर पढ़ाने नही आये और विद्यालय मंे झाड़ू तक नहीं लगी तो खर्चा किस बात का हुआ।

भूखहड़ताल पर बैठने वालांे में महेश सिंह, मंगल पांडे, रीता सिंह, तुलसी सिंह, रानी, हरिओम, विनीता, विजय प्रकाश, नवनीत, संगीत सिंह, अशोक राज सिंह, मोनिका, मीनू सिंह, आदित्य, योगेश, लोकेश, किशोरी, राजेश, राजीव, राजेश, माधव, परी खत्री, दिनेश, दिलीप सागर एडवोकेट, स्वेता सिंह आदि थे।

जिलाधिकारी से मिलेंगे अभिभावक

धरने पर बैठे अभिभावकों का कहना था कि स्कूल प्रबंधन बात सुनने को तैयार नहीं है। बच्चों के सामने वह लज्जित हो रहे हैं। बच्चों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड रहा है। यह कौन से माता पिता चाहेंगे कि उनके बच्चे ऐसी स्थिति का सामना करें। सभी अभिभावकों ने फैसला किया है कि अपनी समस्या से जिलाधिकारी को अवगत कराएंगे ताकि समस्या का समाधान हो सके। समाधान नहीं निकलने पर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

सरकार प्रमोट करने की घोषणा कह चुकी है!

अभिभावकों का यह भी कहना है कि जब सरकार कक्षा आठवीं तक सभी बच्चों को प्रमोट करने की घोषणा कर चुकी है तो स्कूल मैनेजमेंट अभिभावकों व बच्चों पर एग्जाम कराए जाने का दबाब क्यों बनाया रहा है। अभिभावक विद्यालय को पूरी तरह सहयोग करना चाहते हैं लेकिन विद्यालय अपनी मनमानी पर अड़ा हुआ।

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