अभिनेत्री माहिरा शर्मा ने परमार्थ निकेतन गंगा आरती में सहभाग कर ली स्वामी चिदानन्द सरस्वती से आशीर्वाद

  • अपने कार्यो के माध्यम से समाज को जल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का लिया संकल्प
  • फिल्मों के माध्यम से सद्प्रवृत्तियों का अभिवर्द्धन का दिया संदेश
  • सिनेमा और सोशल मीडिया का करें जिम्मेदारी पूर्ण उपयोग – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से बिग बाॅस 13 में प्रवेश करने वाली अभिनेत्री माहिरा शर्मा ने भेंट कर आशीर्वाद लिया तथा परमार्थ निकेतन की विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया।

भगवान शिव की भक्त माहिरा शर्मा ने विश्व शान्ति हवन में पूर्णाहुति समर्पित कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की प्रेरणा से अपने कार्यो के माध्यम से समाज में जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता है समाज सुधार के साथ युवाओं को जल और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने हेतु फिल्में और संदेश प्रसारित किये जायें। वर्तमान समय में फिल्म मेकर फिल्मों के माध्यम से जनसमुदाय को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करने हेतु प्रयासरत है परन्तु अब पर्यावरण के विषयों पर ध्यान केन्द्रित करने वाले संदेशों को प्रसारित करने की आवश्यकता है।

स्वामी जी ने कहा कि हम सभी को अपने-अपने कार्यों से व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करना होगा ताकि व्यापक सामाजिक प्रभाव देखा जा सके।

स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी पूर्ण उपयोग कर समाज में व्यापक परिवर्तन किया जा सकता है। वर्तमान समय में सिनेमा का स्वरूप पहले की अपेक्षा काफी बदल गया है, फिल्मों से समाज की भावनायें और संवेदनायें जुड़ी होती हैं। फिल्में समाज का आईना होती हैं। जिस समाज में हम रहते हैं वहां पर सकारात्मक बदलाव लाने की चाह हमारे अन्दर होनी चाहिये। कुछ कर गुजरने की चाह होनी चाहिये।

एक समय था जब सिनेमा ने फिल्मों के माध्यम से जनसमुदाय के दिलों में देश भक्ति की मशाल को जलाये रखा था, अब भी हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों को जीवंत बनाये रखते हुये पर्यवरण का संदेश प्रसारित कर सकते हैं ताकि हर बच्चा पर्यावरण के महत्व को समझे।

स्वामी जी ने कहा कि फिल्में, सिनेमा और सोशल मीडिया की भूमिका समाज के संतुलन और असंतुलन दोनों स्थितियों में महत्वपूर्ण होती हैं। हमें विवेकवान और विचारवान पीढ़ियों के निर्माण के लिये संतुलित और सकारात्मक भूमिका निभानी होगी तभी विचारशील और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

हम सब को मिलकर समाज में शान्ति, सौहार्द, समरसता, और सौजन्य की भावना विकसित करने का प्रयास करना होगा। फिल्मों के माध्यम से सद्प्रवृत्तियों का अभिवर्द्धन कर मानवता की बहुत बड़ी सेवा कि जा सकती हैं।

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