महर्षि बाल्मीकि को राम कथा वेद से नहीं, माँ जानकी की वेदना से मिली हैै- पुण्डरीक गोस्वामी

हरिद्वार। महाकुम्भ 2021 के अंतर्गत श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार के सारस्वत परिसर में स्थित “मृत्युंजयमंडपम्” में पूज्य “आचार्यश्री” जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्रीमद् माध्वगौडेश्वर जगतगुरू श्रीपुण्डरीक गोस्वामी जी महराज के श्रीमुख से ‘श्रीवाल्मीकि रामायण कथा” का तृतीय दिवस संपन्न हुआ।

पूज्य पुण्डरीक गोस्वामी जी ने कथा के तृतीय दिवस मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम के पावन चरित्रों का श्रवण करवाते हुए कहा कि महर्षि बाल्मीकि को राम कथा वेद से नहीं, माँ जानकी की वेदना से मिली है। श्रीराम कथा साधक को स्थिरता और विषम परिस्थितियों में तनकर खड़े रहने की सामर्थ्य प्रदान करती है, माता शबरी के दृष्टांत को समझाते हुए पूज्य पुण्डरीक जी कहते हैं कि माँ शबरी ने जप, तप, यज्ञ आदि भले कम किए हों, किन्तु दीर्घकाल तक अपने द्वार पर भगवान राम की प्रतीक्षा की।

आज के कथा श्रवण हेतु मलूक पीठाधीश्वर पूज्य श्री स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज, पूजनीया महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी महाराज, आदरणीय श्री विवेक जी ठाकुर, संस्था के न्यासीगण सहित बड़ी संख्या में सन्त-साधक एवं श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।

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