स्वस्थ तन, मन और धन का संवर्धन भारतीय प्राचीन पद्धतियों के द्वारा ही संभव है – के एन गोविंदाचार्य

नर्मदा। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक संरक्षक और हरित भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक श्री के एन गोविंदाचार्य जी ने 1 मार्च को महाराष्ट्र के नंदुरबार और गुजरात के नर्मदा जिले की यात्रा को संपन्न किया। श्री गोविंदाचार्य जी की नर्मदा दर्शन यात्रा और अध्ययन प्रवास 20 फरवरी को अमरकंटक से शुरू हुई। आज यात्रा का दसवां दिन है।
मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिले बड़वानी से आज सुबह यात्रा दल निकला था। शाम तक यह दल मध्यप्रदेश के बड़वानी, महाराष्ट्र के नंदुरबार और गुजरात के नर्मदा जिले के विभिन्न स्थानों पर लोक संवाद, नर्मदा दर्शन और मंदिर दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुआ। और, आज नर्मदा जिले में पड़ाव डाला।
वहीं बड़वानी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में बच्चों से संवाद के दौरान श्री गोविंदाचार्य जी ने शिक्षा और काम को लेकर कुछ सूत्र समझाएं। स्वच्छता के बारे में उन्होंने कहा, घर की सफाई झाड़ू से, शरीर की सफाई साबुन, तेल से, मन की सफाई जप और ध्यान से, बुद्धि की सफाई सत्संग और सत्साहित्य से व चित्त की सफाई सेवा से होती है।
इसके आगे उन्होंने कहा जो भी काम करें परफेक्ट करें। कपड़े कम पानी और कम साबुन में धोए, सुखाने के समय ठीक ढंग से सुखाएं। इसी प्रकार, रोटी बनाए तो भी अच्छे से बनाएं इस बात का ध्यान रखें कि रोटी कहीं मोटा और पतला न रहे और उसे ऐसे पकाएं कि पूरी तरह फूले।

बड़वानी के संस्कार शिक्षा निकेतन में लोक संवाद के दौरान श्री गोविंदाचार्य जी ने कहा, भारत की सभ्यता और संस्कृति का मूल गो माता हैं। नर्मदा तट के लोग गो माता के बारे में जल्दी समझ सकते हैं क्योंकि परंपराएं यहां जिंदा है। यहां के लोग संस्कृति के तत्वों से पूरी तरह परिचित हैं। हम भी यहां उसी का स्वाद चख लेने आए हैं।
आज के लोक संवाद के क्रम में श्री गोविंदाचार्य जी ने कहा, पांच तन मात्राओं के शोधन की आवश्यकता है। जो गो माता के जरिए संभव है।
आकाश, वायु, अग्नि, गोमूत्र और गोबर गो माता की पांच तन मात्राएं हैं। उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए बताया, आकाश का तन मात्रा शब्द है गोमाता के रंभाने से इसका शोधन होता है, वायु का तन मात्रा स्पर्श है गो माता के श्वास, नि:श्वास से वायु का शोधन होता है, अग्नि का तन मात्रा रूप है गाय के दूध और घी से अग्नि का शोधन होता है, ऐसे ही गोमूत्र से जल का शोधन होता है और गोमय से धरती माता शुद्ध होती हैं।
श्री गोविंदाचार्य जी ने कहा, भारत की समृद्धि और संस्कृति का मूल गो माता हैं। अब तक हमने मानव केंद्रित विकास करके विकार ही पैदा किया है। इसके संकेत कोरोना और ग्लेशियर के पिघलने की घटना से मिले। अब हमारे लिए प्रकृति केंद्रित विकास का रास्ता ही अपनाना बचा है।
आज की यात्रा के दौरान श्री गोविंदाचार्य जी नंदुरबार जिले में पुलिंदा और ताप्ती के संगम पर स्थित कोदेश्वर मंदिर में दर्शन और पूजन किया। सोमवार को यात्रा के रास्ते में विभिन्न जगहों पर लोगों ने भावभीनी स्वागत किया।

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1 COMMENT

  1. धर्म यात्रा अपने नाम के अनुरूप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है , भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुरूप शांति ,सद्भाव और समृद्धि के दिशा में धर्म यात्रा एक मील का पत्थर साबित होगा

    डॉक्टर सत्येंद्र कुमार सी ई ओ यूनिवर्सल कम्युनिकेशन मीडिया सेंटर

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