-ब्रज में गायों को दफनाने तक के लिए नहीं है जगह
-पद्मश्री सुदेवी से लेकर दूसरे गोशाला संचालक भी कर रहे हैं संघर्ष
-छोटी ही नहीं बडी गोशालओं के हालात भी हैं बेहद खराब
मथुरा/ मदन सारस्वत।
घटना-एक
मांट तहसील के अंतर्गत डांगौली के पास पंचायती गौशाला है। जिसमें 800 गाय हैं गौशाला के पास 600 एकड़ जमीन भी है। जिसका ट्रस्ट है ट्रस्टी वृन्दावन और कलकत्ता के हैं। गाय के लिए खाने, पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। आये दिन गाय मर रहीं हैं, गौशाला कर्मचारी बिना दफनाये मृत गाय को फेंक देते हैं। आधा सैकड़ा गौ रक्षक ने मृत गाय को फेंकते पकड लिया।
घटना- दो
नौझील क्षेत्र के अंतर्गत गांव बघर्रा की गौशाला में तीन गायों ने दम तोड़ दिया। तीन दिन से गौशाला में गाय मृतक पड़ी हैं। बघर्रा गौशाला के संचालक ने कोई सुध नहीं ली है। बघर्रा गौशाला में गायों की हालत बेहद खराब है। समय पर न तो चारा मिलता है और न ही पानी पीने को मिलता है।
यही सरकारी ढर्रा बेजुबान गायों के लिए मौत का सामान बन गया है। खेतों को चर रहीं आवारा गायों से किसानों में पैदा हुए आक्रोश को देखते हुए शासन स्तर से आनन फानन में ग्राम पंचायतों को अस्थाई गौशाला खोलने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश जनवरी 2019 में जारी हुुआ था। गोशाला की आड में भू माफिया ग्राम पंचायत की जमीन न कब्जा लें इसे भी ध्यान में रखा गया। शासन की ओर से जो गाइड लाइन जारी की गई थी, उसके हिसाब से गायों के 40 डिग्री से अधिक तापमान में जिंदा रखना मुश्किल था। गाइड लाइन के मुताबिक खुले में गौशाला के चारों तरफ गहरी खाई खोद कर गायों को रखा जाए। इसके बाद कई गोशालाओं को लेकर कई बार बडी बातें हुईं लेकिन हालातों में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। कहीं टीनशेड डाले गये लेकिन वह भी गर्मी में कम जानलवा नहीं रहते हैं। अधिकांश खोली गईं स्थाई और अस्थाई गौशाालाआंे में गाय भूख प्यास से मर रही हैं वहीं 40 डिग्री तापमान में खुले आसामन के नीचे पूरे दिन रहने को अभिशप्त हैं। हालात ऐसे हैं कि कहीं कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है तो कहीं गायों को पीने को पानी और खाने को चारा। हद तो तब हो जाती है जब गाय दम तोड दे तो दफनाने को जमीन भी नहीं मिलती।





