जानिए कहां हुआ था हिटलर का जन्म ?

दुनिया में किसी को तानाशाह कहा जाता है तो वो ही हिटलर और तानाशाह हिटलर का जन्म जिस घर में हुआ था उसे ऑस्ट्रिया की संसद ने अपने क़ब्जे में करने के लिए एक क़ानून पास किया है. इस घर की मालकिन जिरलेन पोमर द्वारा सौंपने से लगातार इनकार किए जाने के बाद संसद ने यह क़दम उठाया है. ऑस्ट्रिया के ब्रउनो एम इन शहर में स्थित इस घर पर एक महिला का मालिकाना हक़ था. ऑस्ट्रियाई सरकार ने 1972 से इस घर को लीज़ पर ले रखा था. ऑस्ट्रिया की सरकार नहीं चाहती थी कि यह स्थान नव-नाज़ियों के लिए कोई पवित्र स्थल का रूप ले ले.

कहां है हिटलर का घर

ब्रउनो शहर में थाई रेस्ट्रॉन्ट और सुपरमार्केट पार्किंग के पास एक पीली इमारत है. ऑस्ट्रिया की सरकार के लिए यह इमारत काफ़ी अहम है. इसी घर में हिटलर का जन्म हुआ था. म्यूनिख से यह शहर 70 किलोमीटर पूर्व में जर्मनी से लगती सीमा पर स्थित है.

हिटलर
हिटलर के जन्मस्थान के बाहर एक पत्थर पट्टिका

हिटलर के पैरंट्स ब्रउनो में कस्टम अधिकारी थे. हिटलर का उसी दौरान इस घर में अप्रैल 1889 में हुआ था. 1938 में हिटलर के निजी सचिव मार्टिन बोरमन ने पोमर के दादा-दादी से इस घर को ख़रीद लिया था. बाद में इसे पब्लिक लाइब्रेरी बना दिया गया था. दूसरे विश्व युद्ध के आख़िरी दिनों में अमरीकी सैनिकों को जर्मन फ़ौज ने इसे गिराने से रोक दिया था. बाद में इस घर को फिर से 1954 में पोमर की मां ने ऑस्ट्रिया की सरकार से ख़रीद लिया था. अभी यह साफ नहीं है कि सरकार इस घर का क्या करना चाहती है. पहले इस इमारत को ध्वस्त करने की योजना थी लेकिन सरकार ने अब इस योजना को स्थगित कर दिया है. सरकार घर की मालिकन को इसके लिए मुआवज़ा देगी. सरकार के ताज़ा फ़ैसले के बाद ऑस्ट्रिया में सियासी हलचल बढ़ गई है. कुछ राजनेताओं और लोगों को कहना है कि सरकार का क़दम प्रॉपर्टी के अधिकार पर हमला है. इस इलाक़े के सांसद हैरी बचमेर ने कहा कि यह आख़िरी विकल्प था और कहा कि ऐसा करना ज़रूरी था. ऑस्ट्रियाई सरकार की यह संवैधानिक मजबूरी है कि वह नव-नाज़ियों के उभार को रोके. साल 2014 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर इस घर की मालकिन पोमर ने सरकार का लीज़ कैंसल कर दिया था.

हिटलर
हिटलर

सरकार इसके लिए उन्हें पांच हजार डॉलर प्रति महीने देती थी. पोमर के इस क़दम से सरकार परेशान हो गई थी. सरकार ने बाद में इस घर को ख़रीदने का प्रस्ताव रखा था लेकिन पोमर ने साफ इंकार कर दिया था. ऑस्ट्रियाई संसद के इस क़दम की लोग खूब आलोचना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि सरकार भविष्य में राजनीतिक कारणों से संपत्ति जब़्त कर सकती है.

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