भारतीय सेना के अनूठे जनरल जिन्होंने जीवन भर मांस-मदिरा को हाथ नहीं लगाया

  • अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी हैं मे.जनरल नरपत सिंह राजपुरोहित
  • सेना भर्ती बोर्ड मुख्यालय पर भाग्योदय फाउंडेशन के तत्वावधान में हरिशंकरी का रोपण किया गया

लखनऊ। भाग्योदय फाउंडेशन का संजीवनी वृक्षारोपण अभियान अनवरत जारी है। शुक्रवार को लखनऊ छावनी स्थित सेना भर्ती मुख्यालय प्रांगण में हरिशंकरी का रोपण किया गया। दो दिन पहले हरियाली तीज पर तो उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में हरिशंकरी रोपा गया, जिसमें वन मन्त्री श्री दारा सिंह चौहान और कानून मन्त्री श्री बृजेश पाठक समेत कई गण्यमान व्यक्तियों के भी हाथ लगे। यूपी-उत्तराखण्ड सैन्य भर्ती बोर्ड के मुखिया अपर महानिदेशक मे.जनरल श्री नरपत सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में आज लखनऊ में वृक्षारोपण किया गया। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उत्तर प्रदेश के विशेष वन सचिव डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी विशेष रूप से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

भाग्योदय प्रमुख आचार्य राम महेश मिश्र ने बताया कि भाग्योदय फाउंडेशन एवं भारतीय कृषक दल के इस संयुक्त कार्यक्रम में ब्रिगेडियर राहुल भटनागर, कर्नल मयंक खरे, कर्नल संजय पाण्डेय, कर्नल अजीत कुमार, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयप्पा एन.एस. समेत कई सैन्य अफसरों की मौजूदगी ने भाग्योदय परिवार का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री कफीलुर्रहमान एवं कैंट क्षेत्र के फारेस्ट अफसर श्री अविनाश कुमार सिंह चौहान तथा सेना भर्ती मुख्यालय के साथियों को सभी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए भाग्योदय टीम का आभार कहा।

श्री मिश्र कहते हैं कि हम सबके लिए बड़े पुलकित करने वाले क्षण थे जब जनरल नरपत सिंह राजपुरोहित के वृद्ध पिता श्री जगन्नाथ सिंह राजपुरोहित पाली-राजस्थान से लखनऊ पधारे और उन्होंने अपने सुसंस्कारी व बहादुर सुपुत्र का आज नागपंचमी को जन्मदिन होने की सूचना हम सबको दी। तब वह आर्मी ग्राउंड अद्भुत गायत्री महामंत्र से गूंज उठा। श्री मिश्र द्वारा किये गए वेदमंत्रोच्चार के बीच जनरल साहब को उनके जन्मोत्सव पर सभी ने मंगलकामनाएं दीं।

वरिष्ठ सैन्य अफसर के पिताजी ने वह दिव्य घटना भी बतायी जब नागपंचमी के पावन दिवस पर गांव की कच्ची कोठरी में जन्में बालक के जन्म के समय विशाल काला नाग उस कक्ष में प्रकट हुआ था। वहां मौजूद सब लोग आशंकित होकर डर से कांप रहे थे और उन पलों में गर्भिणी यानी जन्मदात्री मां को वहां से अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया जा सकता था। वह बताते हैं कि शिशु की दादी यानी मेरी माताजी ने सबको चुपचाप काम करने की आज्ञा दी थी और इसे सदाशिव भगवान शंकर का दिव्य आशीर्वाद बताकर नागदेव को प्रणाम करने को कहा था। और, फिर कुछ समय बाद नागदेवता अचानक वहाँ से अंतर्ध्यान हो गए थे। भाग्योदय प्रमुख ने बताया कि इस चर्चा के समय मेजर जनरल राजपुरोहित मुस्करा भर दिए और अपना संकल्प सुनाया कि मैं सेना की सेवा पूर्ण करने के बाद अपनी जन्मभूमि-अपने गांव को ही शेष जीवन का हेड क्वार्टर बनाऊंगा तथा अपने पूज्य दाता (पिताजी) के आशीष की छाया में देशसेवा करूँगा।

जनरल नरपत सिंह राजपुरोहित के यह बताने पर वह स्थान तालियों से गूंज उठा कि उन्होंने अपनी माँ (अब स्मृतिशेष) के आदेशानुसार सम्पूर्ण जीवन मांस-मदिरा तथा किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं किया है और हमेशा सत्य का पल्ला पकड़े रखा है। बड़े भावक स्वर में जनरल साहब ने बताया, मां कहती थी- बेटा! ब्राह्मण पुत्र को मांस, मदिरा तथा किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिये। पिताश्री जगन्नाथ सिंह राजपुरोहित ने बताया कि हमारा नरपत 10 साल की उम्र से ही घर के बाहर है, जब उसका प्रवेश आर्मी स्कूल में हुआ था। बाद में वह एन.डी.ए. में शामिल हुए। कहा, मेरे बेटे में अनुशासन और देशभक्ति कूट-कूटकर भरे हुए हैं।

श्री राम महेश मिश्र ने बताया कि जब हमने सभीजन को गुरुदेव पूज्यश्रेष्ठ पं.श्रीराम शर्मा आचार्य लिखित युग साहित्य भेंट किया तब सबने उसे मस्तक से स्पर्श करके ऋषिसत्ता के प्रति अपना प्रणाम निवेदित किया। हमारे लिए वे पल बड़े मर्मस्पर्शी थे। बताया कि उपस्थित विशिष्टजनों ने भाग्योदय फाउंडेशन के उद्देश्यों के बारे में हमसे जाना।

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