जाके प्रिय न राम बैदेही।तजिये ताहि कोटि बैरी सम, जदपि परम सनेही

नई दिल्ली। तस्वीर तकरीबन एक दशक पुरानी है…लेकिन जो दरबार,जो छवि,जो मूरत आप देख रहे हैं वो सजीव है। हमारे श्रीराघवेंद्र सरकार सपरिवार अनंत बलवंत श्रीहनुमंत लाल जी महाराज के संग विराजमान हैं…एक मेले में ये छवि देखकर फोटो लिए बगैर रहा नहीं गया….कहते हैं कि स्मृतियां अच्छी हों…तो उसे संजो कर रखनी चाहिए प्रेरणा मिलती है…और जब संग राघव जी का हो तो फिर क्या कहने….

ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि….

ये नश्वर संसार चल ही मेरे श्री राम के नाम से है। सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, वायु सभी में जो शक्तियां विद्यमान है वो सब मेरे श्रीराम नाम की है।

श्रीराम का नाम तो अविनाशी है। दुनिया इधर से उधर हो जाए, सब कुछ बदल जाए पर यह राम नाम ज्यों का त्यों यूं ही सदा बना रहेगा ये मेरा और मेरे जैसे करोड़ो करोड़ो का दृढ़ विश्वास है। इस राम नाम की महिमा कभी भी कम नहीं होगी बल्कि दिन-प्रतिदिन इसकी महिमा बढ़ते ही जाएगी।

क्योंकि श्रीराम का नाम तो मणिदीप की तरह है जो कभी बुझता ही नहीं है। जैसे दीपक को चौखट पर रख देने से घर के अंदर और बाहर दोनों हिस्से प्रकाशित हो जाते हैं, वैसे ही राम नाम को जपने से अंतःकरण और बाहरी आचरण दोनों प्रकाशित हो जाते हैं। जीवन में आनंद ही आनंद हो जाता है।

–‘श्रीराम’—यह भगवान राम के प्रति पुकार है । –‘जय राम’—यह उनकी स्तुति है –‘जय जय राम’—यह उनके प्रति पूर्ण समर्पण है । तभी तो इस कलियुग में भी रामजी शरणागत का पालन करते हैं…।

अन्त में…..

श्रीरामचरन अब भी जन को उतना ही सुखदाई है ।

करुणासागर की करुणा में कहीं कमी नहीं कोई आई है ।।

न ही राघव ने अपनी विरद की रीति भुलाई है ।

साधु संत सद्ग्रन्थों ने किया झूठी नहीं बड़ाई है ।।

-विनयावली ।

(लेखक – संदीप कुमार मिश्र, वरिष्ठ टीवी पत्रकार)

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