त्योहारों पर लगने वाले मेले कौमी एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र के अनूठे उदाहरण हैंं- स्वामी अवधेशानंद गिरि

हरिद्वार। पूज्य “सद्गुरुदेव” जी ने कहा – “ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते …”।। देवी माँ दुर्गा दैवीय शक्ति का स्रोत हैं। वह नकारात्मक गुणों का नाश करने वाली और शुभता प्रदात्री हैं ..! हमारी संस्कृति में नवरात्र पर्व की साधना का विशेष महत्व है। नवरात्रि का यह त्योहार हमारे भारतवर्ष में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है, नवरात्रि का पर्व हमारी भारतीय संस्कृति का ऐसा त्योहार है जो नारी की महत्ता को, उसकी शक्ति को दर्शाता है। नारी वह शक्ति है जो अपने अंदर असीम ऊर्जा को समाये हुये है, जिसके बिना मनुष्य की संरचना, पोषण, रक्षण और आनन्द की कल्पना नहीं की जा सकती और नवरात्रि में हम उसी नारी शक्ति को ‘देवी माँ’ के रूप में पूजते हैं। भारतीय संस्कृति में पुत्री को देवी स्वरूप माना गया है। इस देवी का भाव और उसके प्रति आदर हम खोते जा रहे हैं। देवी की शोभा मंदिर में ही है और मंदिर के बाहर वह धर्म की रक्षा के लिए ही आती है। इसलिए पुत्रियों को अपने दैवीय स्वरूप को बनाए रखने के लिए मर्यादा में रहकर ही सारे कार्य करना चाहिए, जिससे कि उनकी पवित्रता बनी रहे। आज हम सभी को संकल्प लेना होगा कि हम संस्कृति संरक्षण और प्रचार प्रसार के अभिनव अभियान में भागीदार बनें और समाज को बुराइयों से मुक्त कराते हुए ऐसा बदलाव लाएं जहाँ सभी लोग निर्भय होकर आत्मिक शांति पा सकें। पूज्य “आचार्यश्री” जी ने कहा कि जीवन को हँसी-खुशी व रिश्तों को मजबूत बनाने में त्योहारों का अहम् योगदान है। भारत त्योहारों का देश है। साल के हर दिन कोई न कोई त्योहार यहाँ मनाया जाता है। त्योहार खुशियां बांटने और पूरे समाज को जोड़ने का काम करते हैं। भारत के अनगिनत त्योहर और मेले हमें एकता और भाईचारे का सन्देश देते हैं। त्योहारों पर लगने वाले मेले कौमी एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र के अनूठे उदाहरण हैं। इन पर्वों और मेलों में समाज के सभी वर्गों के लोग सम्मिलित हो कर विश्व को भारत की बहुरंगी संस्कृति झलक दिखाते हैं …।

पूज्य “आचार्यश्री” जी ने कहा – मेले एवं त्योहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परम्परा एवं रीति-रिवाजों के परिचायक हैं। विविधता में एकता के प्रतीक कुम्भ पर्व में उत्सवों के आयोजन से हमारी संस्कृति को संजोने और सहेजने को बल मिलता है, साथ ही साथ नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध संस्कृति एवं परम्पराओं का भी ज्ञान होता है। कुम्भ पर्वों में मेलों के आयोजन से भाईचारा, सद्भाव कायम रहता है। मेले हमारी संस्कृति और समाज को जीवंत बनाते है। जब किसी एक स्थान पर बहुत से लोग किसी सामाजिक, धार्मिक एवं सम्पूर्ण राष्ट्र के उत्थान के लिए एकत्र होते हैं तो उसे महाकुम्भ कहते हैं। मेले और त्योहार भारत का एक बड़ा आकर्षण है। यह इस देश की जीवंत संस्कृति को तो दिखाते ही हैं साथ ही यह भारत के पर्यटन उद्योग में भी बहुत विशेष जगह रखते हैं। भारत की समृद्ध संस्कृति के असली रंग दिखाने के अलावा ये महापर्व देश में सैलानियों के आने के लिए आकर्षण पैदा करने में बहुत महत्व रखते हैं। कुम्भ महापर्व देश के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। मेले भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग रहे हैं। वास्तव में एक-दूसरे के निकट आने और आपसी सहयोग और सौहार्द्र की भावना ने मेलों को जन्म दिया, जिसकी झलक वर्तमान भारत में भी देखी जा सकती है। कुम्भ का पर्व लोक-संस्कृति, परंपरा और लोक संस्कारों के विविध रूपों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है। हमारे पर्व लोक-संस्कृति और परंपरा के माध्यम से आस्था, उमंग और उत्सव की छवि प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार कुम्भ महापर्व हमारे समाज को जोड़ने तथा हमारी संस्कृति और परंपरा को सुरक्षित रखने में अहम् भूमिका निभाता है …।

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