कोरोनाः 342 नए केस मिले, 391 ठीक हुए, अब तक 152 मौतें

  • बुधवार को कोरोना संक्रमण से तीन लोगोें की मौत
  • डरावना है कोरोना से हो रहीं मौतों का आंकडा
  • सरकारी आंकडों से जुदा भी हो सकता है सच

मथुरा/ मदन सारस्वत। कोरोना का कहर जारी है। सरकारी आंकडे कोरोना से जितनी मौत होना बता रहे हैं। सच्चाई इन आंकडों से जुदा भी हो सकती है। आंकडों की जुबानी और श्मशान घाट की कहानी एक दूसरे से मेल नहीं खा रही है। बुधवार को कोरोना संक्रमण से तीन लोगांे की मौत हो गई।
जिले में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को 342 नए कोरोना मरीज मिले हैं। इनमें से चुरमुरा में 37 एवं चंदनवन में 16 कोरोना पॉजिटिव सामने आए हैं। इसके साथ जिले में 3238 कोरोना के एक्टिव केस हैं। जबकि पिछले एक दिन में 391 कोरोना संक्रमित ठीक हो गए हैं। अब तक जिले में 192 कोरोना संक्रमित अपनी जान गवां चुके हैं। मथुरा जिले में एक नहीें दो नहीं बल्कि सरकारी आकंड़ों से कई गुना ज्यादा कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार हो रहे हैं। मथुरा के श्मशान घाट पर ही अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग चल रही हैं। लोगों को घंटों अपने व्यक्ति की अंत्येष्टि के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार का सामान बेचने वाले पंडित राधेश्याम ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना से पूर्व में 6 से 8 मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए सामान जाता था। लेकिन जब से वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर प्रारंभ हुई है तब से 30 से 35 मृतकों के लिए सामान जा रहा है जिससे 5 गुना मृत्यु दर बड़ी है। वही हम बात करें मृतकों के अंतिम संस्कार करने का स्थान यानी श्मशान घाट स्थल की तो वहां पर भी अंतिम संस्कार करने के लिए लाइन लगी हुई है। श्मशान स्थल पर तैनात महेश अरोड़ा ने बताया कि आम दिनों के देखते हुए अब मरने वालों की संख्या 6 गुनी बढ़ गई है । अन्य बीमारियों से मरने वाले 10 या 12 लोग आते हैं तो वहीं कोरोना संक्रमण से मरने वाले 50 से 60 लोगों के शव श्मशान घाट पर आ रहे हैं। जबकि सरकारी आकड़ों के अनुसार पिछले सात दिनों में कोरोना से 10 लोगों की मौत हो हुई है। इनमें भी तीन कोरोना संक्रमितों की जान बुधवार को गई है। यह जानकारी कोविड के नोडल अधिकारी भूदेव सिंह ने दी।

जिला चिकित्सालय में 45 वर्षीय महिला की मौत
जिला चिकित्सालय में बुधवार को एक 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतका के पुत्र ने कहाकि जिला चिकित्सालय की ओर से कह दिया गया था कि उनके पास आक्सीजन नहीं है। मैं खुद अपनी ओर से आक्सीजन सिलैण्डर का इंतजाम कर रहा था। यहां आलादर्जे की लापरवाही बरती जा रही है। लपरवाही में ही में ही मेरी मां की जान चली गई।

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