शुद्ध चेतना, शुद्ध विचारों व शुद्ध गुणों को जागृत करता है योग-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

” साध्वी भगवती सरस्वती जी के 50 वें जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर पूज्य श्री रमेश भाई ओझा जी (भाईश्री), स्वामी नारायण गुरूकुल के संस्थापक, श्री माधवप्रिय दास जी स्वामी, भारतीय-अमेरिकी लेखक, वैकल्पिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं विश्व प्रसिद्ध मोटिवेश्नल स्पीकर डॉ दीपक चोपड़ा तथा भारत सहित विश्व के अन्य देशों में रहने वाले भक्तों के भावभरे संदेशों का प्रसारण एवं ऑनलाइन वेबिनाॅर का आयोजन “
ऋषिकेश, 13 मार्च। विश्व विख्यात 32 वाँ अन्र्राष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर परमार्थ गंगा तट पर आयोजित विश्व शान्ति महायज्ञ में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला जी ने सहपरिवार सहभाग किया। श्री बिड़ला जी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंटवार्ता की। दोपहर के पश्चात श्री ओम बिड़ला जी और समस्त बिड़ला परिवार ने वेदमंत्रों की दिव्य ध्वनि के साथ गंगा स्नान कर सांयकालीन परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया। विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचन्द अग्रवाल जी ने भी दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया, स्वामी जी ने रूद्राक्ष का पौधा देकर सभी का अभिनन्दन किया।
परमार्थ गंगा तट पर वेदमंत्रों का गायन, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा कर श्री ओम बिड़ला जी और डा अमिता बिड़ला जी की वैवाहिक वर्षगांठ मनायी गयी। इस पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने रूद्राक्ष का पौधा और जय गंगे अंगवस्त्र भेंट कर बिड़ला दंपत्ति का अभिनन्दन किया। स्वामी जी ने कहा कि आप दोनों समर्पित भाव से सात्विकता और निष्ठा के साथ स्वस्थ, व्यस्त और मस्त रहते हुये इसी तरह राष्ट्र सेवा करते रहे।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के सातवें दिन की शुरूआत प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरू पूज्य मूजी के उद्बोधन के साथ हुई। आध्यात्मिक सत्र में पूज्य मूजी ने online के माध्यम सेे ‘मौन के महत्व’ पर  प्रकाश डाला। तत्पश्चात विश्व विख्यात योगाचार्यो द्वारा योग, ध्यान, प्राणायाम और आसनों का अभ्यास कराया गया।
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला जी ने कहा कि कोविड-19 के कारण वैश्विक स्तर पर अनेक बदलाव हुये ऐसे में परमार्थ निकेतन द्वारा ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से योग जिज्ञासुओं को योग गुरूओं और अन्य दिव्य विभूतियों से वर्चुअल रूप से जोड़ने का अवसर प्रदान किया। इस तनाव के दौर में यह अत्यंत आवश्यक भी है। भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने योग को अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की सूची में शामिल करवाया और स्वामी जी महाराज योग को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य कर रहे है।
श्री बिड़ला जी ने कहा कि भारत में योग एक दर्शन है और जीवन पद्धति भी है। सभी योग और ध्यान की विभिन्न विधाओं के माध्यम से शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाकर आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करे। योग जीवन की यात्रा को सरल और शान्त बनाता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर कहा कि योग भारतीय दर्शन का प्रमुख अंग है, यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वयं को बेहतर, स्वस्थ और व्यवस्थित बनाने की एक विधा है जो की मन-मस्तिष्क में शुद्ध चेतना, शुद्ध विचारों व शुद्ध गुणों को जागृत करता है तथा भावनात्मक मजबूती प्रदान करता है।
स्वामी जी ने कहा कि योग केवल शरीर का नहीं बल्कि आत्मा का विज्ञान है। जैसे-जैसे हम योग और ध्यान का अभ्यास करते हैं हम वातावरण के प्रति और जागरूक हो जाते हैं। वर्तमान समय में भागदौड़ भरा जीवन, तनाव, दुख, पीड़ा, अज्ञात भय जैसी भावनाओं से उबरने के लिये योग सबसे उपयुक्त माध्यम है। योग निराशावादी जीवन को आशावादी बनाता है। योग, जीवन की एक शुरूआत है और इसका अंत है जीवन में शान्ति का समावेश। योग के अभ्यास से दुनिया को देखने, सोचने और समझने का नजरिया बदल जाता है तथा हम सत्य और वास्तविकता की ओर मुड़ने लगते हैं। ध्यान व्यक्ति को वर्तमान क्षण में जीना सिखा देता है क्योंकि वास्तविक जीवन केवल वर्तमान क्षण में ही निहित है और वही क्षण हमारा है उसी क्षण में हम प्रभुत्व और बुद्धत्व को  प्राप्त कर सकते हैं और यही एकमात्र क्षण है जिस पर हमारा प्रभुत्व है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डा साध्वी भगवती जी ने कहा कि 32 वर्षों की योग महोत्सव की इस यात्रा में वर्ष 2021 का योग महोत्सव एक नये स्वरूप के साथ ऐतिहासिक भी रहा। इस वर्ष वर्चुअल माध्यम से परमार्थ निकेतन, योगनगरी ऋषिकेश से योग को हर घर और हर घट तक पहुंचाया। साध्वी जी ने सभी योगाचार्यो, आध्यात्मिक गुरूओं, संगीतज्ञों, मोटिवेशनल स्पीकर और सभी योग जिज्ञासुओं का अभिनन्दन करते हुये कहा कि सभी ने इस योग यात्रा में वर्चुअल रूप से जुड़कर इसे ऐतिहासिक बना दिया। ऐसा पहली बार हुआ जब सभी ने अपने घर में रहकर योग की विभिन्न विधाओं, ध्यान, प्राणायाम और सत्संग का आनन्द लिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने रूद्राक्ष का पौधा देकर श्री ओम बिड़ला जी, श्री प्रेमचन्द अग्रवाल,  सांसद  श्री अजय भट्ट और पूरे बिड़ला परिवार का माँ गंगा के तट पर अभिनन्दन किया।

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