शिव रोग-दोष और दुष्प्रवृत्तियों के शमनकर्ता हैं – स्वामी अवधेशानंद गिरि

हरिद्वार। महाकुंभ 2021, हरिद्वार के अंतर्गत श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनंतश्रीविभूषित
जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में विश्वकल्याण के निमित्त चारो प्रहर की भगवान भोलेनाथ का पूजन और अभिषेक संपन्न हुआ।

आत्मानुशासन और ऐन्द्रिक संयम द्वारा शिवत्व को जागृत करने, शाश्वत स्वरूप बोध और दिव्यता के प्रस्फुटन के पवित्र पर्व ‘महाशिवरात्रि’ के अवसर पर जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में विश्व-कल्याण के निमित रात्रि पर्यन्त भूतभावन भगवान शिव का पूजन और अभिषेक सम्पन्न हुआ।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव आदरणीय श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी जी ने महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर सपरिवार श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में पूज्य “आचार्यश्री” जी से सौजन्य भेंट और आध्यात्मिक चर्चा की ।

महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालु गणों को संबोधित करते हुए पूज्य “आचार्यश्री” जी ने कहा – शिव का अर्थ है- कल्याणकारी ! जिनके अनुसरण और अनुगमन से मनुष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो वही शिव है। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता हैं, संहार ही पुनः सृजन का मूल है। शिव रोग-दोष और दुष्प्रवृत्तियों के शमनकर्ता हैं। उनको ‘आशुतोष’ भी कहा जाता है, क्योंकि वो भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। शिव को प्रसन्न करने के लिए बड़े-बड़े लौकिक अनुष्ठानों की जरूरत नहीं पड़ती। विशुद्ध अन्तःकरण और किंचित जलधार मात्र से ही वो भक्तों के अभीष्ट की सिद्धि कर देते हैं।
भगवान शिव विद्या-विवेक और विचार के देवता हैं। मनुष्य ही नहीं देवताओं ने भी जब-जब देवों के देव महादेव का विस्मरण किया है, तब-तब उन पर संकट आया है।
समुद्र मंथन के पौराणिक प्रसंग में समुद्र मंथन से ‘कालकूट’ नाम का भयंकर विष निकला और तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। उस समय में विष के भय से पीड़ित सृष्टि की रक्षा भगवान शिव ने ही की थी। आज भी मनुष्य के अज्ञान के कारण जो जीवन के अस्तित्व पर संकट खड़ा है उसका निदान शिव कृपा से ही संभव है।
प्रतीकात्मक रूप से समुद्र मंथन का अभिप्राय मनोमंथन से है। मानवता अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत हो, ऐसे समय में शिवत्व का अनुगमन ही मनुष्यत्व की रक्षा का एकमात्र विकल्प है। भगवान पारदेश्वर एवं भगवान महामृत्युंजय शिव साधकों के अभीष्ट की सिद्धि में सहायक हों !!

महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर प्रभु प्रेमी संघ की अध्यक्षा पूजनीया महामंडलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी सोमदेव गिरि जी, पूज्य स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी, न्यासी गण एवं बड़ी संख्या में साधक गण सम्मिलित हुए।

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