आयुर्वेद के पुनर्जागरण में आचार्य बालकृष्ण का अद्भुत योगदान – स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आयुर्वेद केन्द्र पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें देते हुये कहा कि आप सदैव स्वस्थ रहें एवं दीर्घायु हों तथा मानवता के लिये लम्बे समय तक अपनी सेवायें देते रहें।

पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मोत्सव जड़ी बूटी दिवस के रूप में मनायें जाने तथा इस दौरान योगगुरु स्वामी रामदेव जी और आचार्य बालकृष्ण जी द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन एक अद्भुत पहल है। इस अवसर पर स्वयं भी स्क्तदान करना युवाओं के लिये एक श्रेष्ठ व अनुकरणीय संदेश है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण जी ने आयुर्वेद के पुनर्जागरण में तथा आयुर्वेद के क्षेत्र में अद्भुत कीर्तिमान स्थापित किये है। इसी तरह से वे आगे बढ़ते रहे तथा राष्ट्र निर्माण की गंगा उनके माध्यम से प्रवाहित होती रहे।
उन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से एक स्वस्थ जीवन शैली के सर्वोत्तम तरीकों से अवगत कराया।

आयुर्वेद ‘जीवन का विज्ञान’ है; आयुर्वेद तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार करता है। आयुर्वेद में न केवल उपचार होता है बल्कि यह जीवन जीने का ऐसा तरीका सिखाता है, जिससे स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिया जा सकता है। वर्तमान समय में आचार्य बालकृष्ण जी ने इस ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार द्वारा आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मोत्सव जड़ी बूटी दिवस के रूप में मनाया जाना यह आयुर्वेद की विकास यात्रा के लिये मील का पत्थर साबित होगा।

जड़ी बूटी तो आयुर्वेदिक चिकित्सा का श्रेष्ठत्तम आधार है। शास्त्रों में 15,000 से अधिक जड़ी-बूटियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से केवल 900 का उपयोग आमतौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है। नीम, अदरक, आंवला, अश्वगंधा, गिलाय, तुलसी और हल्दी जैसे कई पौधें जो हमारे आस-पास हैं, वर्तमान समय में उनके महत्व को पुनः आज की पीढ़ी के सामने लाने में आचार्य बालकृष्ण जी का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे महान महर्षियों ने चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय 2,000 से भी अधिक साल पहले संस्कृत में लिखी थी इन महान ग्रंथों में वर्णित जड़ी बूटियों को वर्तमान समय में  प्रायोगिक स्तर पर सर्वसुलभ बनाने हेतु आचार्य बालकृष्ण जी का आभार। पुनः जन्मदिवस की शुभकामनायें।

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