
आगरा -‘भगवान सूर्य का अर्चन, व्रत, पूजन, कथा आदि जन्मों तक फलित होता है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मनुष्य की इस जन्म की समस्त व्याधियों का कारण ही यह है कि उसने पूर्व जन्म में भगवान सूर्य का पूजन अर्चन नहीं किया। अयोध्या की रानी चंद्रमुखी तथा पुरोहित पत्नी मानमणिका ने भगवान सूर्य के पूजन में भूल करने के कारण ही कष्ट उठाए।’ कथावाचक डॉ दीपिका उपाध्याय ने भविष्य पुराण का महत्व बताते हुए उक्त प्रवचन कहे।
गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में चल रही श्रीभविष्य पुराण कथा का आज पूर्ण विश्राम हुआ। इस अवसर पर श्रीगोपालजी धाम, दयाल बाग में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
कथावाचक ने भगवान सूर्य के भक्तों की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान सूर्य के निमित्त व्रत करने से ही माता देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए तथा उनके शेष सात पुत्र भी जीवित होकर स्वधाम गए।
यही नहीं पर्वत मुनि एवं नारद मुनि की कथा सुनाते हुए कथा वाचक ने बताया कि भगवान सूर्य का व्रत करने से मनुष्य की बुद्धि अत्यंत तीव्र हो जाती है तथा वह जातिस्मर होने का सौभाग्य प्राप्त करता है। आगे कथा वाचक ने भविष्य पुराण का महत्व में बताते हुए कहा कि इस पुराण के नियमित पाठन से मनुष्य को यश, बुद्धि, विद्या, रूप, सम्मान आदि प्राप्त होता है। विद्यार्थियों को विशेष तौर पर सूर्य आराधना करनी चाहिए। भगवान के नाम संकीर्तन तथा सूर्य सहस्त्रनाम के साथ कथा का पूर्ण विश्राम हुआ। कथा के उपरांत आयोजित भंडारे में सूर्य भक्तों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। फाउंडेशन के निदेशक रवि शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।





